ट्रम्प ने भारत को कहा 'डेड इकोनॉमी', जबकि खुद कमा रहे अरबों रुपये

ट्रम्प ने भारत को कहा 'डेड इकोनॉमी', जबकि खुद कमा रहे अरबों रुपये अप्रैल, 6 2026

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' (मृत अर्थव्यवस्था) बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका अपना बिजनेस साम्राज्य भारतीय रियल एस्टेट बाजार से करोड़ों डॉलर बटोर रहा है। यह अजीब विरोधाभास तब सामने आया जब जुलाई 2025 में ट्रम्प ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। लेकिन सवाल यह है कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था 'डेड' है, तो अमेरिकी टेक दिग्गज यहाँ अरबों डॉलर निवेश करने के लिए क्यों लाइन लगा रहे हैं?

दरअसल, मामला सिर्फ बयानों का नहीं बल्कि बड़े बिजनेस हितों का है। ट्रम्प ने रूस के साथ भारत के संबंधों पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि भारत क्या करता है, क्योंकि दोनों की अर्थव्यवस्थाएं वैसे भी डूब रही हैं। लेकिन कागजों पर कहानी कुछ और ही है। ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन भारत में एक बेहद चालाकी भरे 'जीरो-इन्वेस्टमेंट मॉडल' पर काम कर रहा है। यहाँ वे जमीन नहीं खरीदते, न ही निर्माण का खर्च उठाते हैं, बस अपना नाम 'लाइसेंस' देते हैं और बदले में मोटी फीस और बिक्री का 3-5% हिस्सा ले लेते हैं।

दिखावा 'डेड इकोनॉमी' का, हकीकत 'करोड़ों की कमाई' की

आंकड़ों पर नजर डालें तो यह खेल और भी साफ हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले 2024 में ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन ने भारतीय प्रोजेक्ट्स से 12 मिलियन डॉलर कमाए। इसमें से 10 मिलियन डॉलर तो सिर्फ मुंबई में बन रहे एक अकेले टॉवर से आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2012 से 2019 के बीच उन्होंने मुंबई, पुणे, गुरुग्राम और कोलकाता के प्रोजेक्ट्स से 11.3 मिलियन डॉलर की रॉयल्टी वसूल की। (सोचिए, बिना एक पैसा लगाए इतना मुनाफा!)

अब यह विस्तार और भी तेजी से हो रहा है। 2024 तक उनके पोर्टफोलियो में भारत के छह प्रमुख शहरों—मुंबई, पुणे, गुरुग्राम, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा में 13 से ज्यादा लग्जरी प्रोजेक्ट्स शामिल हो चुके हैं। नवंबर 2024 में चुनाव जीतने के बाद, ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन और ट्रिबेका ने पुणे, गुरुग्राम और हैदराबाद में 8 मिलियन वर्ग फुट के नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया। अनुमान है कि इन नए प्रोजेक्ट्स से ट्रम्प को करीब 15,000 करोड़ रुपये (1.8 बिलियन डॉलर) की कमाई होगी। अब तक भारत से उनकी कुल कमाई 175 करोड़ रुपये के पार जा चुकी है, जिसमें हर महीने 10-15 करोड़ रुपये का औसत मुनाफा जुड़ रहा है।

अमेरिकी टेक दिग्गजों का भारत पर भरोसा

ट्रम्प के शब्दों और अमेरिकी कंपनियों की हरकतों में जमीन-आसमान का अंतर है। जब राष्ट्रपति भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बता रहे थे, तब गूगल अपनी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय निवेश योजना तैयार कर रहा था। अक्टूबर 2025 में गूगल ने विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में एक एआई हब बनाने के लिए 15 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की। यह न केवल गूगल का अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा निवेश है, बल्कि भारत का पहला गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर कैंपस भी होगा।

इतना ही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और OpenAI ने भी भारत में लाखों करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है। अब आप ही सोचिए, क्या कोई कंपनी किसी 'डेड इकोनॉमी' में अपने भविष्य के सबसे कीमती एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को निवेश करेगी? जाहिर है, जवाब 'ना' है।

अर्थव्यवस्था के आंकड़े: भारत बनाम अमेरिका

अगर हम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के डेटा को देखें, तो हकीकत ट्रम्प के बयानों को पूरी तरह खारिज करती है। 2024 में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5% रही, जबकि अमेरिका की ग्रोथ महज 1.8% थी। यहाँ तक कि 2025 के लिए अमेरिका की अनुमानित जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 1.5% है। पिछले पांच तिमाहियों से भारत की विकास दर लगातार बढ़ रही है और दुनिया की कोई भी बड़ी अर्थव्यवस्था इस गति का मुकाबला नहीं कर पा रही है।

मुख्य तथ्य एक नजर में:
  • ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन की भारत में कुल कमाई: 175 करोड़+ रुपये
  • गूगल का विशाखापट्टनम एआई हब निवेश: 15 बिलियन डॉलर
  • भारत की जीडीपी ग्रोथ (2024): 6.5% बनाम अमेरिका की 1.8%
  • नए प्रोजेक्ट्स से संभावित कमाई: 15,000 करोड़ रुपये
  • भारत के 6 शहरों में फैले हैं ट्रम्प के 13+ रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स

आगे क्या होगा?

1 अगस्त 2025 से लागू होने वाले 25% टैरिफ निश्चित रूप से व्यापारिक तनाव पैदा करेंगे। लेकिन ट्रम्प का यह दोहरा रवैया—एक तरफ सार्वजनिक आलोचना और दूसरी तरफ निजी मुनाफा—दिखाता है कि उनकी विदेश नीति अक्सर उनके व्यापारिक हितों के इर्द-गिर्द घूमती है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या ये टैरिफ वास्तव में भारतीय निर्यात को प्रभावित करते हैं या फिर अमेरिकी कंपनियां निवेश के नए रास्ते खोज लेती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड' क्यों कहा?

ट्रम्प ने जुलाई 2025 में भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने विशेष रूप से रूस के साथ भारत के संबंधों पर अपनी नाराजगी जाहिर की और संकेत दिया कि भारत और रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाएं कमजोर हो रही हैं। हालांकि, आर्थिक आंकड़े इस दावे के विपरीत हैं।

ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन भारत में पैसा कैसे कमा रहा है?

वे 'जीरो-इन्वेस्टमेंट लाइसेंसिंग मॉडल' का उपयोग करते हैं। इसमें वे भारत के रियल एस्टेट डेवलपर्स को अपने ब्रांड नाम 'Trump' का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। इसके बदले में वे एक निश्चित फीस और कुल बिक्री का 3% से 5% हिस्सा लेते हैं, जबकि निर्माण या जमीन खरीदने का कोई जोखिम नहीं उठाते।

गूगल का विशाखापट्टनम निवेश क्यों महत्वपूर्ण है?

गूगल का 15 बिलियन डॉलर का निवेश अमेरिका के बाहर उनका सबसे बड़ा निवेश है। यह विशाखापट्टनम में भारत का पहला गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर कैंपस होगा, जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी को जोड़ेगा। यह दर्शाता है कि वैश्विक कंपनियां भारत की भविष्य की क्षमता पर भरोसा करती हैं।

भारत और अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ में क्या अंतर है?

IMF के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.5% थी, जो अमेरिका की 1.8% ग्रोथ से कहीं अधिक है। 2025 के लिए अमेरिका की अनुमानित ग्रोथ और भी कम होकर 1.5% रहने की उम्मीद है, जो भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाता है।

ट्रम्प के भारतीय प्रोजेक्ट्स किन शहरों में हैं?

ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन के लग्जरी प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से मुंबई, पुणे, गुरुग्राम, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा जैसे शहरों में फैले हुए हैं। हाल ही में पुणे, गुरुग्राम और हैदराबाद में नए बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई है।